India AI Impact Summit 2026 का दूसरा दिन: भारत की डिजिटल शक्ति का वैश्विक प्रदर्शन
नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 का दूसरा दिन रणनीतिक घोषणाओं, तकनीकी विमर्श और वैश्विक सहयोग के ठोस संकेतों के साथ आगे बढ़ा। यह सम्मेलन केवल एक तकनीकी कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की उस महत्वाकांक्षा का सार्वजनिक प्रदर्शन है जिसमें देश स्वयं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नीति-निर्माता, नवाचार केंद्र और वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित करना चाहता है।
करीब 65 देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी ने इस आयोजन को बहुपक्षीय संवाद का मंच बना दिया। सरकारी प्रतिनिधि, बहुराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों के प्रमुख, स्टार्टअप संस्थापक, डेटा वैज्ञानिक, नीति विशेषज्ञ और शिक्षाविद—सभी ने AI के भविष्य पर अपने विचार रखे।
समिट का व्यापक संदर्भ
भारत पिछले एक दशक में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ा है। डिजिटल भुगतान, आधार-आधारित पहचान प्रणाली, जनधन खातों और सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण ने एक ऐसा आधार तैयार किया है, जिस पर AI आधारित समाधान विकसित किए जा सकते हैं।
दूसरे दिन की चर्चाओं में यह स्पष्ट संकेत मिला कि भारत AI को केवल तकनीकी नवाचार के रूप में नहीं, बल्कि समावेशी विकास, प्रशासनिक पारदर्शिता और आर्थिक उत्पादकता के साधन के रूप में देख रहा है।
राष्ट्रीय एआई नीति 2.0 की झलक
सम्मेलन में सरकार द्वारा प्रस्तावित “राष्ट्रीय एआई नीति 2.0” के प्रमुख बिंदुओं की रूपरेखा साझा की गई। इस नीति का उद्देश्य है:
- जिम्मेदार और नैतिक AI उपयोग सुनिश्चित करना
- डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करना
- भारतीय भाषाओं के लिए AI मॉडल विकसित करना
- ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में AI आधारित समाधान लागू करना
- शिक्षा और स्वास्थ्य में AI-संचालित नवाचार को बढ़ावा देना
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति भारत को AI के क्षेत्र में केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता और निर्यातक बनने की दिशा में ले जा सकती है।
प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण: मानव-केंद्रित AI
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की प्राथमिकता “मानव-केंद्रित AI” है। उनका जोर इस बात पर था कि तकनीक का उपयोग मानव गरिमा, रोजगार सृजन और सामाजिक समावेशन को बढ़ाने के लिए होना चाहिए।
उन्होंने कृषि में स्मार्ट एनालिटिक्स, स्वास्थ्य सेवाओं में रोग पहचान, और शिक्षा में व्यक्तिगत लर्निंग मॉड्यूल के उदाहरण देते हुए बताया कि AI किस प्रकार भारत के विविध सामाजिक ढांचे में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
स्टार्टअप और निजी क्षेत्र की भूमिका
दूसरे दिन का एक बड़ा आकर्षण स्टार्टअप पिच सेशन रहा, जिसमें भारतीय और विदेशी स्टार्टअप्स ने अपने AI-आधारित समाधान प्रस्तुत किए।
- हेल्थटेक कंपनियों ने कैंसर और हृदय रोगों की प्रारंभिक पहचान के लिए AI मॉडल प्रदर्शित किए।
- एग्रीटेक स्टार्टअप्स ने मिट्टी विश्लेषण और मौसम पूर्वानुमान आधारित खेती समाधान पेश किए।
- एडटेक प्लेटफॉर्म ने बहुभाषी AI ट्यूटर सिस्टम दिखाए।
निजी क्षेत्र और सरकार के बीच साझेदारी को “AI पारिस्थितिकी तंत्र” के निर्माण की अनिवार्य शर्त बताया गया।
वैश्विक मानकों पर चर्चा
सम्मेलन में AI के लिए वैश्विक नियामक ढांचे की आवश्यकता पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कई देशों ने डेटा लोकलाइजेशन, एल्गोरिदमिक पारदर्शिता और एथिकल AI के लिए साझा दिशा-निर्देशों की वकालत की।
भारत ने यह प्रस्ताव रखा कि वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों को AI नीति-निर्माण में समान भागीदारी दी जानी चाहिए।
विश्लेषकों के अनुसार, यह रुख भारत को “Responsible AI Leader” के रूप में स्थापित कर सकता है।
आर्थिक प्रभाव और रोजगार
AI के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए रोजगार के स्वरूप में परिवर्तन पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि AI कुछ पारंपरिक नौकरियों को प्रभावित करेगा, लेकिन नई तकनीकी और विश्लेषणात्मक भूमिकाओं का सृजन भी करेगा।
सरकार ने संकेत दिया कि स्किल डेवलपमेंट मिशन के तहत AI और मशीन लर्निंग प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का बयान: वैश्विक शक्ति के रूप में भारत की स्वीकृति
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव António Guterres ने हाल ही में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नीति-निर्माण में सक्रिय और निर्णायक शक्ति बन चुका है।
वैश्विक आर्थिक संतुलन में बदलाव
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्र धीरे-धीरे विकसित देशों से हटकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ओर बढ़ रहा है। भारत, अपनी जनसंख्या, बाजार क्षमता और तकनीकी नवाचार के कारण इस परिवर्तन का प्रमुख लाभार्थी बन सकता है।
भारत की GDP वृद्धि दर, डिजिटल भुगतान प्रणाली की सफलता और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती को वैश्विक स्तर पर सराहा गया।
जलवायु और सतत विकास में भूमिका
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने जलवायु परिवर्तन और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
- नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश
- सौर ऊर्जा मिशन
- हरित हाइड्रोजन पहल
- इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा
इन सभी कदमों को वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप माना गया।
कूटनीतिक प्रभाव
भारत ने हाल के वर्षों में बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने, वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को सशक्त करने और शांति स्थापना अभियानों में भागीदारी—इन सभी क्षेत्रों में भारत की भूमिका बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र की यह टिप्पणी भारत की बढ़ती रणनीतिक विश्वसनीयता का संकेत है।
तकनीक और कूटनीति का संगम
AI समिट और संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के बयान को यदि एक साथ देखा जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि भारत तकनीकी नेतृत्व और कूटनीतिक प्रभाव—दोनों क्षेत्रों में समानांतर रूप से आगे बढ़ रहा है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल को वैश्विक स्तर पर साझा करने की पहल भारत को विकासशील देशों के लिए एक उदाहरण बना सकती है।
संपादकीय विश्लेषण: 2026 का भारत – तकनीकी और रणनीतिक शक्ति
2026 का भारत केवल आर्थिक वृद्धि का प्रतीक नहीं, बल्कि वैश्विक नीति-निर्माण में सक्रिय भागीदारी का संकेत है।
AI समिट यह दर्शाता है कि भारत तकनीक के माध्यम से विकास का नया मॉडल प्रस्तुत करना चाहता है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का बयान यह स्वीकार करता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर निर्णायक भूमिका निभा रहा है।
दोनों घटनाएँ मिलकर यह स्पष्ट करती हैं कि:
- भारत तकनीकी नवाचार में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर है।
- वैश्विक मंच पर उसकी आवाज़ पहले से अधिक प्रभावशाली हो चुकी है।
- आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक नीतियों में भारत की भागीदारी अनिवार्य होती जा रही है।
यदि भारत AI के क्षेत्र में संतुलित नियमन, स्किल विकास और वैश्विक सहयोग को सफलतापूर्वक लागू करता है, तो वह आने वाले वर्षों में विश्व अर्थव्यवस्था और नीति-निर्माण का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
निष्कर्ष
India AI Impact Summit 2026 और संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का बयान—दोनों घटनाएँ इस बात की पुष्टि करती हैं कि भारत का विकास केवल घरेलू सीमाओं तक सीमित नहीं है।
तकनीक, अर्थव्यवस्था और कूटनीति—इन तीनों स्तंभों पर आधारित भारत की नई रणनीति उसे 21वीं सदी की वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर कर रही है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत इन अवसरों को किस प्रकार दीर्घकालिक नीतियों और जमीनी क्रियान्वयन में परिवर्तित करता है।
Frequently Asked Questions (FAQ)
India AI Impact Summit 2026 क्या है?
India AI Impact Summit 2026 एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास, नियमन, नैतिक उपयोग और वैश्विक सहयोग पर चर्चा करना है। इसमें कई देशों के प्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ और नीति-निर्माता भाग ले रहे हैं।
इस समिट में भारत की मुख्य प्राथमिकताएँ क्या हैं?
भारत की प्राथमिकताएँ हैं:
- जिम्मेदार और मानव-केंद्रित AI
- डेटा सुरक्षा और गोपनीयता
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना
- स्टार्टअप और रिसर्च को बढ़ावा देना
- शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में AI का उपयोग
क्या इस समिट में कोई नई AI नीति की घोषणा हुई है?
समिट के दौरान “राष्ट्रीय AI नीति 2.0” की रूपरेखा प्रस्तुत की गई, जिसमें नैतिक AI, डेटा गवर्नेंस और कौशल विकास पर विशेष जोर दिया गया है।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने भारत के बारे में क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव António Guterres ने कहा कि भारत अब एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति बन चुका है और वैश्विक नीतिगत संतुलन में उसकी भूमिका आवश्यक हो गई है।
भारत को वैश्विक शक्ति क्यों माना जा रहा है?
भारत को वैश्विक शक्ति इसलिए माना जा रहा है क्योंकि:
- तेज़ आर्थिक वृद्धि
- डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन
- वैश्विक मंचों पर सक्रिय भूमिका
- जलवायु और सतत विकास लक्ष्यों में योगदान
- तकनीकी नवाचार में तेजी
क्या AI भारत में रोजगार को प्रभावित करेगा?
AI कुछ पारंपरिक नौकरियों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन साथ ही नई तकनीकी और डेटा-आधारित नौकरियों का सृजन भी करेगा। सरकार स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को नई तकनीकों के लिए तैयार कर रही है।
भारत का AI मॉडल अन्य देशों से कैसे अलग है?
भारत का AI मॉडल “मानव-केंद्रित और समावेशी विकास” पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल तकनीकी लाभ नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक समानता सुनिश्चित करना है।

