ऑस्ट्रेलिया में महात्मा गांधी की प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ और चोरी: भारत ने जताई कड़ी आपत्ति
नई दिल्ली |
ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा के साथ हुई चोरी और तोड़फोड़ की घटना ने न केवल भारतीय समुदाय बल्कि भारत सरकार को भी गहरी चिंता में डाल दिया है। भारत ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, असम्मानजनक और सांस्कृतिक मूल्यों पर आघात बताया है, तथा ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन से तुरंत और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
यह प्रतिमा मेलबर्न के रोविल (Rowville) स्थित ऑस्ट्रेलियन इंडियन कम्युनिटी सेंटर परिसर में स्थापित थी, जो भारतीय मूल के लोगों के लिए एक सांस्कृतिक और सामाजिक केंद्र माना जाता है। जानकारी के अनुसार, अज्ञात लोगों ने प्रतिमा को उसके आधार से काटकर हटा दिया, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि यह कोई साधारण शरारत नहीं बल्कि योजनाबद्ध कृत्य था।
भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महात्मा गांधी केवल भारत के नेता नहीं, बल्कि विश्व में शांति, अहिंसा और मानवता के प्रतीक हैं। ऐसी प्रतिमा के साथ इस प्रकार का व्यवहार वैश्विक मूल्यों के विरुद्ध है। भारत ने ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों से आग्रह किया है कि दोषियों की पहचान कर उन्हें कानून के तहत सख्त सजा दी जाए और प्रतिमा को शीघ्र बरामद किया जाए।
भारतीय समुदाय में आक्रोश
मेलबर्न में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों ने इस घटना को गहरे दुख और आक्रोश के साथ लिया है। उनके अनुसार, यह केवल एक मूर्ति नहीं थी, बल्कि उनकी पहचान, विरासत और भावनाओं का प्रतीक थी। इस घटना ने वहां के भारतीय समुदाय को असुरक्षित और आहत महसूस कराया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
महात्मा गांधी की प्रतिमा दुनिया के कई देशों में स्थापित है, जो भारत के सांस्कृतिक प्रभाव और गांधीजी के सार्वभौमिक संदेश का प्रतीक है। ऑस्ट्रेलिया जैसे मित्र देश में इस प्रकार की घटना होना कूटनीतिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह मामला अब केवल स्थानीय अपराध न रहकर अंतरराष्ट्रीय संवेदनशीलता का विषय बन गया है।
जांच और आगे की कार्रवाई
विक्टोरिया पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस ने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी के पास इस घटना से जुड़ी कोई जानकारी हो तो वह आगे आए।
निष्कर्ष
यह घटना हमें याद दिलाती है कि सांस्कृतिक प्रतीकों की सुरक्षा केवल किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि वैश्विक समाज की साझी जिम्मेदारी है। महात्मा गांधी के विचार सीमाओं से परे हैं, और उनकी प्रतिमा के साथ इस प्रकार की घटना उन मूल्यों के खिलाफ है जिन पर आधुनिक सभ्यता टिकी है।
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